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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) उत्तराखंड ने बुधवार को योग गुरु बाबा रामदेव पर 1000 करोड़ रुपए का मानहानि का केस दर्ज कराया है। एसोसिएशन ने यह केस सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बाबा रामदेव के उस वीडियो के आधार पर किया है, जिसमें बाबा एलोपैथी को बकवास और दिवालिया साइंस कह रहे हैं।

हालांकि, बाबा ने बाद में अपना बयान वापस ले लिया था। इस पर एसोसिएशन का कहना है कि रामदेव ने जो बयान दिया है उसके जवाब में अगर वे अगले 15 दिनों में वीडियो जारी नहीं करते और लिखित रूप से माफी नहीं मांगते, तो वे उनसे 1000 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति की डिमांड करेंगे।

IMA ने नोटिस भेजा था
इससे पहले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने शनिवार को बाबा रामदेव पर एलोपैथी इलाज के खिलाफ झूठ फैलाने का आरोप लगाया था। IMA ने रामदेव को एक लीगल नोटिस भेजा था। डॉक्टर्स की संस्था ने रामदेव पर मुकदमा चलाने की मांग भी की थी। हालांकि, रामदेव की संस्था पतंजलि ने बयान जारी कर आरोपों को गलत बताया था।

रामदेव ने DGCI की साख को चुनौती दी
IMA ने लिखा था, ‘बाबा रामदेव ने ये दावा किया है कि रेमडेसिविर, फेवीफ्लू और DGCI से अप्रूव दूसरी ड्रग्स की वजह से लाखों लोगों की मौत हुई। उन्होंने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) और स्वास्थ्य मंत्री की साख को चुनौती दी है। कोरोना मरीजों के इलाज में रेमडेसिविर के इस्तेमाल की मंजूरी केंद्र की संस्था सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने जून-जुलाई 2020 में दी थी। ये भ्रम फैलाने और लाखों लोगों की जान खतरे में डालने के लिए बाबा रामदेव पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। रामदेव ने फेवीपिराविर को बुखार की दवा बताया था। इससे पता चलता है कि मेडिकल साइंस को लेकर उनका ज्ञान कितना कम है।’

पहले भी विवादित बयान देने का आरोप
IMA ने पत्र में लिखा है कि इससे पहले कोरोना के लिए बनाई गई अपनी दवा की लॉन्चिंग के दौरान भी रामदेव ने डॉक्टर्स को हत्यारा कहा था। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री भी मौजूद थे। सभी इस बात को जानते हैं कि बाबा रामदेव और उनके साथी बालकृष्ण बीमार होने पर एलोपैथी इलाज लेते हैं। इसके बाद भी अपनी अवैध दवा को बेचने के लिए वे लगातार एलोपैथी के बारे में भ्रम फैला रहे हैं। इससे एक बड़ी आबादी पर असर पड़ रहा है।

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