देश में कोरोना की दूसरी लहर कोहराम मचा रही है। महज एक सप्ताह में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में 10 लाख से अधिक का इजाफा होने से लोग डरे हुए दिखाई दे रहे है। अचानक से मरीजों की संख्या बढ़ने और हेल्थ सिस्टम के फेल होने से कोरोना की दूसरी लहर पहली लहर से भी ज्यादा घातक नजर आ रही है। वहीं कोरोना वायरस के हवा के जरिए फैलने को लेकर लैसेंट की रिपोर्ट के दावों ने भी एक भय का माहौल बनाया है।

ऐसे में ‘वेबदुनिया’ ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्था (ICMR) के महामारी विज्ञान और संक्रामक रोग विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. रमन गंगाखेडकर से बातचीत की। कोरोना वायरस के हवा के जरिए फैलने की नई रिपोर्टस पर डॉ. रमन गंगाखेडकर कहते हैं कि हवा में कोरोना वायरस का विषाणु रहता है यह पहले से हमको पता है। हमको यह समझना होगा कोरोना वायरस के प्रसार के रुट बदले हुए नहीं है।

कोई ओरजिनल स्टडी नहीं है,एक ओपनियन है-डॉक्टर रमन गंगाखेडकर कहते हैं कि हवा में कोरोना वायरस फैलने को लेकर लैंसेट की कोई ओरजिनल स्टडी नहीं है यह एक ओपनियन है जिसमें दस स्टडीज के फैक्टर को मिलाकर यह कहा गया है कि शायद यह हवा से अच्छे से फैलता होगा। इसमें कुछ भी नहीं है हम पहले से यह बोलते आए है कि कि कोरोना वायरस का ड्रॉपलेट इंफेक्शन होता है या एयरोसोल ट्रांसमिशन। एयरोसोल के ट्रांसमिशन का खतरा वहां होता है जहां सही तरीके से वेंटीलेशन नहीं होता है जैसे बंद कमरे। वहीं कोरोनावायरस का ड्रॉपलेट इंफेक्शन एयरबोर्न होता है लेकिन हमको ऐसे हालात में घबराने की जरुरत नहीं है।एयरोसोल से संक्रमण का खतरा-अगर कोरोना वायरस हवा से फैलता तो सारे के सारे लोग संक्रमित हो जाते है क्योंकि हवा तो सब के लिए एक ही है। इसलिए इसमें कोई सच्चाई नहीं है इस तरह से केवल डर फैलता है। इस बात के डर को निकालना होगा कि हवा के जरिए कोरोना वायरस आपको संक्रमित कर देगा चाहे आप घर से बाहर नहीं निकले हो। अभी कोरोना वायरस का जो संक्रमण हो रहा है वह एयरबोर्न के कारण अधिक हो रहा है। इसका मतलब अगर एक संक्रमित व्यक्ति नहीं भी खांसता है तो हम उससे बात करते है उससे एयरोसोल निकलते है जो हमको संक्रमित कर सकता है।

मास्क और वेटींलेशन बचाएगा संक्रमण से-डॉक्टर रमन गंगाखेडकर कहते हैं कि अगर आपने मास्क पहने के साथ कोरोना संयमित व्यवहार का सहीं तरीके से पालन कर रहे है तो आप बहुत हद तक संक्रमण से बच सकते है। फिर चाहे हवा से आए या कहीं से आए। हमको ऐसी जगह से जाने से बचना होगा जहां वेंटीलेशन नहीं है क्योंकि यहां पर संक्रमित व्यक्ति के एयरोसोल से आप संक्रमित हो सकते है। इसके साथ सार्वजनिक स्थल पर आपको सोशल डिस्टेंसिंग बनानी होगी।
डॉक्टर रमन गंगाखेड़कर कहते हैं कि अगर कोरोना वायरस का अगर हवा से इंफेक्शन होता है तो सबसे पहले डॉक्टर इसकी चपेट में आते है क्योंकि वह फ्रंटलाइन पर हर दिन एक्सपोजर हो रहा है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।इसलिए हमको समझना होगा कोरोना वायरस का संक्रमण वहीं होगा जहां वेंटीलेशन नहीं होगा। जैसे बंद कमरे अगर कोई संक्रमित व्यक्ति आता है तो एयरोसोल की वजह से दूसरे लोगों के संक्रमित होने का खतरा रहता है इसमें कोई दो राय नहीं है। अगर आप कोई संयमित व्यवहार कर रहे है तो आपक इंफेक्शन से बच सकते है। अगर आप सोशल डिस्टेंसिंग नहीं कर रहे तो आप इंफेक्शन में आ सकते है।
दूसरी लहर में संक्रमण के तेजी से फैलने का कारण-पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में अधिक लोगों के संक्रमित होने का सबसे बड़ा कारण कोरोना संक्रमित पाए गए लोगों के संपर्क में आने वालों की कांट्रेक्ट ट्रैंसिंग नहीं हो पाना है क्योंकि संक्रमण चारों तरफ फैल चुका है। पहली लहर में अगर कोई संक्रमित मिलता था हम उसके संपर्कों का आसानी से पता लगा लेते थे। इसके साथ कोरोना की दूसरी लहर के लिए हमारी खुद की लापरवाही जिम्मेदार है। मास्क नहीं लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग के नहीं पालन करने से अब कोरोना विकराल रुप ले लिया है।

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