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उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा नदी में लगातार बहते मिल रहे शवाें का मामला गंभीर हो रहा है। खबरों के मुताबिक इस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी संज्ञान लिया है। उसने केंद्र, बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों को नोटिस जारी किए हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने बहते शवों के मामले को कोरोना प्रोटोकॉल का सरासर उल्लंघन बताया है।

बताया जाता है कि एनएचआरसी ने केंद्र, बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। उनसे पूछा गया है कि उन्होंने गंगा में बहते शवों के मामले में अब तक क्या कार्रवाई की, बताएं? दूसरी ओर, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा अभियान से जुड़ी केंद्रीय संस्था एनएमसीजी ने संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को चिट्‌ठी लिखी।

एनएमसीजी के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने इसमें लिखा है, ‘गंगा में शवाें या कंकाल फेंकना काेराेना प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। इससे न केवल नदी प्रदूषित हाेती है, बल्कि गंगा तट के शहराें, गांवाें के लाेगाें में संक्रमण का जाेखिम है। इसे राेकने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाए जाएं।’ चिट्ठी बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवाें काे लिखी गई है। इन राज्यों से गंगा गुजरती है।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में गंगा तट पर रेत में दफन मिले शव, जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में गंगा तट पर रेत में दफन शवाें की तस्वीरें सामने आई हैं। ये तस्वीरें जिले के शुक्लागंज हाजीपुर के रौतापुर गंगा घाट की हैं। एक वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहा है। इसमें कब्राें पर गेरुए रंग का कपड़ा और माला-फूल रखा दिख रहा है। कुछ कब्राें से रेत हट जाने से सड़े हुए शव नजर आ रहे हैं।

अवारा कुत्ते भी इनके पास मंडराते दिखे। उन्नाव के जिला कलेक्टर रवींद्र कुमार ने कहा, “हमने अपनी टीम को माैके पर भेजा है। नदी से दूर रेत में कब्रें मिली हैं। अन्य क्षेत्रों में भी शवों की खोज की जा रही है। मैंने जांच के लिए कहा है। आगे की कार्रवाई की जाएगी।’

वहीं एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘अगर हम इन शवाें काे कब्र से निकालते हैं, ताे कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हाे जाएगी। हम देखेंगे कि बेहतर क्या किया जा सकता है।’ रोक के बावजूद एक महीने में गंगा तट पर करीब 400 शवों को दफनाया गया है।

पश्चिम बंगाल ने गंगा तट पर निगरानी बढ़ाई

उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा में तैरते शवाें के मिलने और केंद्र की चिट्ठी के बाद पश्चिम बंगाल ने कई जगहों पर गंगा तटाें की निगरानी बढ़ा दी है। राज्य प्रशासन ने निर्देश दिया है कि बहकर आने वाले शवाें काे निकालकर रीति-रिवाज और प्रोटोकॉल के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाए। झारखंड के राजमहल से गंगा बंगाल के मानिकचक ब्लाॅक में दाखिल हाेती है। यहां नदी का पाट बहुत चाैड़ा है। इसलिए निगरानी के लिए इलाके में नाैकाएं लगाई जा रहीं हैं।

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