सेक्स टेप कांड में घिरे कर्नाटक के मंत्री रमेश जारकीहोली ने नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। टेप वायरल होने के बाद से रमेश जरकिहोली निशाने पर थे और उनके चलते सूबे के सीएम बीएस येदियुरप्पा भी विपक्ष के आरोपों में घिरे थे। जल संसाधन मंत्री के तौर पर कैबिनेट का दर्जा रखने वाले रमेश जारकीहोली का एक महिला संग अश्लील बातचीत का ऑडियो टेलीविजन चैनलों पर चलाया जा रहा था। सोशल ऐक्टिविस्ट दिनेश कल्लाहल्ली ने बेंगलुरु के क्यूबन पुलिस थाने में शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नौकरी का झांसा देकर महिला का यौन उत्पीड़न किया गया।

दरअसल दिनेश कल्लाहल्ली ने बेंगलुरु शहर के पुलिस कमिशनर कमल पंत से मुलाकात की तो कुछ न्यूज चैनल्स ने जरकीहोली के तथाकथित निजी पल के वीडियो मीडिया में प्रसारित कर दिए। हालांकि, अभी तक यह नहीं पता लगा है कि यह वीडियो कितना पुराना है। मामला सामने आते ही सीएम येदियुरप्पा ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ इस मसले पर मीटिंग की थी। इसके बाद कहा जा रहा था कि एक बार मंत्री का पक्ष सुनने के बाद ही उनके इस्तीफे पर फैसला लिया जाएगा। बता दें कि 60 वर्षीय जरकिहोली कर्नाटक के बेलागवी से आते हैं और येदियुरप्पा कैबिनेट में ताकतवर नेता माने जाते हैं।

इससे पहले मंगलवार को राज्य के एक और मंत्री बीसी पाटिल को लेकर भी कर्नाटक सरकार विवादों में थी। दरअसल बीसी पाटिल ने घर पर ही स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाकर टीका लगवाया था। इसे लेकर विवाद छिड़ गया था कि जब पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत तमाम सीनियर नेताओं ने अस्पताल में ही टीका लगवाया है तो फिर उनकी ही पार्टी के मंत्री ऐसा कैसे कर सकते हैं। इस पर जवाब देते हुए बीसी पाटिल ने कहा था कि उस वक्त उनके घर में कई लोग बैठे थे और यदि वह अस्पताल जाते तो फिर लोगों को इंतजार करना पड़ता। ऐसे में उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को ही घर बुला लिया था और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

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